डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को क्रिएटर्स के लिए रेवेन्यू मॉडल बदलने होंगे: अश्विनी वैष्णव
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से क्रिएटर्स के लिए रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल (Revenue Sharing Models) पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मॉडल अक्सर क्रिएटर्स के लिए न्यायसंगत नहीं होते हैं और उन्हें बेहतर समर्थन की आवश्यकता है।
अश्विनी वैष्णव ने रेवेन्यू मॉडल बदलने का आग्रह किया।
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डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को क्रिएटर्स के लिए अपने रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर दोबारा विचार करना होगा। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि कंटेंट बनाने वालों को उनके काम का उचित प्रतिफल मिले।
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Intro: भारत में तेजी से बढ़ती क्रिएटर इकोनॉमी (Creator Economy) को लेकर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (Digital Platforms) को अब कंटेंट क्रिएटर्स (Content Creators) के साथ अपने रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल (Revenue Sharing Models) पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब लाखों भारतीय युवा डिजिटल माध्यमों से अपनी आजीविका कमा रहे हैं, लेकिन अक्सर उन्हें अपने कंटेंट का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। इस पहल का उद्देश्य क्रिएटर्स के लिए अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत आर्थिक ढांचा तैयार करना है।
मुख्य जानकारी (Key Details)
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान में कई प्लेटफॉर्म्स के मॉडल क्रिएटर्स को उनके योगदान के अनुपात में लाभ नहीं दे रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि प्लेटफॉर्म्स को अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उन लोगों के साथ साझा करना चाहिए जो वास्तव में वैल्यू क्रिएट कर रहे हैं। वैष्णव ने कहा कि सरकार क्रिएटर्स के इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें बेहतर Monetization के रास्ते तलाशना भी शामिल है। यह कदम न केवल क्रिएटर्स को सशक्त करेगा बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवाचार (Innovation) को भी बढ़ावा देगा। इस बदलाव की मांग क्रिएटर्स लंबे समय से कर रहे थे, क्योंकि कई बार विज्ञापन राजस्व (Ad Revenue) का बड़ा हिस्सा प्लेटफॉर्म्स के पास चला जाता है।
तकनीकी विवरण (Technical Insight)
रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल आमतौर पर विज्ञापन प्रदर्शन (Ad Impressions), सब्सक्रिप्शन (Subscriptions) या ई-कॉमर्स बिक्री पर आधारित होते हैं। मौजूदा सिस्टम में, प्लेटफॉर्म्स अक्सर एक बड़ा कमीशन रखते हैं, जिससे क्रिएटर्स को कम रिटर्न मिलता है। वैष्णव का सुझाव है कि प्लेटफॉर्म्स को अपने Algorithms और Monetization Policies को अधिक पारदर्शी बनाना चाहिए। उन्हें शायद डायनामिक शेयरिंग मॉडल (Dynamic Sharing Models) अपनाने की जरूरत है जो कंटेंट की गुणवत्ता और यूजर एंगेजमेंट (User Engagement) के आधार पर भुगतान करे, न कि केवल प्लेटफॉर्म की नीतियों पर।
भारत और यूजर्स पर असर (Impact on India)
भारत में करोड़ों लोग डिजिटल कंटेंट का उपभोग करते हैं। यदि क्रिएटर्स को बेहतर कमाई का मौका मिलेगा, तो वे उच्च गुणवत्ता वाला कंटेंट बनाने के लिए प्रेरित होंगे। इससे भारतीय यूजर्स को अधिक प्रासंगिक और उत्कृष्ट सामग्री मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह कदम भारतीय डिजिटल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता कम करने में भी सहायक हो सकता है। यह स्पष्ट संदेश है कि सरकार भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स के हितों की रक्षा के लिए सक्रिय है।
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उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट क्रिएटर्स के लिए रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल को बेहतर बनाने का आग्रह किया।
ताकि कंटेंट बनाने वालों को उनके योगदान के अनुसार अधिक न्यायसंगत और उचित कमाई हो सके।
सरकार क्रिएटर्स के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने और उन्हें बेहतर समर्थन देने पर काम कर रही है।